भगवान कृष्ण के शाश्वत राज्य का भ्रमण करें। पावन द्वारकाधीश मंदिर (जगत मंदिर), प्रतापी नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, दिव्य बेट द्वारका द्वीप, प्राचीन भड़केश्वर महादेव मंदिर, इस्कॉन मंदिर द्वारका और शांत गोमती घाट के दर्शन करें, यह है द्वारका, गुजरात की आपकी पूरी गाइड।
द्वारका, गुजरात के सर्वाधिक पूजनीय मंदिरों और तीर्थ स्थलों की दिव्य यात्रा पर निकलें। भव्य द्वारकाधीश मंदिर और पावन नागेश्वर ज्योतिर्लिंग से लेकर बेट द्वारका द्वीप, गोमती घाट, भड़केश्वर महादेव मंदिर और इस्कॉन मंदिर द्वारका तक, भगवान कृष्ण के शाश्वत राज्य की संपूर्ण कृपा का अनुभव करें।
प्रतिष्ठित जगत मंदिर, गुजरात के द्वारका में भगवान कृष्ण का 2500 वर्ष पुराना चार धाम मंदिर। द्वारकाधीश मंदिर खुलने का समय: प्रातः 6:30 से दोपहर 1:00, सांध्य 5:00 से रात 9:30। भारत के सर्वाधिक पावन तीर्थ स्थलों में से एक।
मंदिर देखें
भगवान शिव के बारह पावन ज्योतिर्लिंगों में से एक, गुजरात में ओखा राजमार्ग पर द्वारका नगर से 17 किमी दूर स्थित। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग में भगवान शिव की 25 मीटर ऊँची प्रतिमा है। प्रतिदिन सुबह 5:00 से रात 9:00 तक खुला।
आशीर्वाद लें
गुजरात का वह पावन द्वीप जहाँ भगवान कृष्ण निवास करते थे, द्वारका के पास ओखा से फ़ेरी द्वारा सुलभ। बेट द्वारका मंदिर खुलने का समय: प्रातः 6:00 से दोपहर 12:00, सांध्य 5:00 से रात 9:00। यात्रा का शांत और अवश्य देखने योग्य पड़ाव।
द्वीप देखें
अरब सागर के चट्टानी टापू पर खड़ा भगवान शिव का प्राचीन और शक्तिशाली मंदिर, द्वारका नगर से कम ज्वार में पैदल सुलभ। भड़केश्वर महादेव मंदिर गुजरात के सबसे नाटकीय तटीय तीर्थ स्थलों में से एक है।
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गुजरात के द्वारका में भगवान कृष्ण और राधा को समर्पित भव्य इस्कॉन मंदिर। इस्कॉन द्वारका प्रतिदिन सभी दर्शनार्थियों के लिए खुला रहता है और नियमित भजन, कीर्तन तथा आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित करता है। द्वारका नगर का एक प्रिय और शांत गंतव्य।
इस्कॉन देखें
द्वारका नगर में गोमती नदी और अरब सागर का पावन संगम। गोमती घाट द्वारका अपनी हृदयस्पर्शी संध्या आरती के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ सूर्यास्त पर भक्त दीये जलाते हैं और हवा अगरबत्ती की सुगंध तथा भक्ति भजनों से भर उठती है।
घाट देखें
द्वारका का इतिहास हिन्दू शास्त्रों जितना ही प्राचीन है। महाभारत और विष्णु पुराण में द्वारावती नाम से विख्यात द्वारका नगर भगवान कृष्ण के राज्य की राजधानी और हिन्दू धर्म की सात पावन पुरियों (सप्त पुरी) में से एक था। जगत मंदिर कहलाने वाला द्वारकाधीश मंदिर द्वारका, गुजरात के शाश्वत आध्यात्मिक हृदय के रूप में खड़ा है।
पुरातत्वविदों ने द्वारका के तट से दूर जलमग्न अवशेष खोजे हैं जो प्राचीन जलमग्न सभ्यता की कथाओं की पुष्टि करते हैं। द्वारकाधीश मंदिर का हर स्तंभ, गोमती घाट की हर सीढ़ी और नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की हर प्रार्थना भगवान कृष्ण की कालजयी महिमा और द्वारका, गुजरात के पावन इतिहास की गूँज है।
द्वारका का इतिहास पढ़ें
द्वारका नगर का दैनिक जीवन सदियों से अपरिवर्तित प्राचीन अनुष्ठानों के इर्द-गिर्द घूमता है। भगवान कृष्ण का अभिषेक और द्वारकाधीश मंदिर का पावन ध्वजा रोहण समारोह ऐसे महत्वपूर्ण आयोजन हैं जो प्रतिदिन भारत भर से हज़ारों भक्तों को द्वारका, गुजरात खींच लाते हैं।
सूर्यास्त के समय गोमती घाट द्वारका की संध्या आरती का अनुभव लें, जहाँ हवा अगरबत्ती की सुगंध और घंटियों की ध्वनि से भरकर शुद्ध दिव्यता रच देती है। इस्कॉन मंदिर द्वारका में भी प्रतिदिन आरतियाँ और कीर्तन होते हैं जो दिव्य ऊर्जा और भक्ति के साथ पूरे द्वारका नगर में गूँजते हैं।
सभी अनुष्ठान देखें
गुजरात के द्वारका का द्वारकाधीश मंदिर प्राचीन चालुक्य स्थापत्य की सर्वोच्च उत्कृष्ट कृति है। जगत मंदिर पाँच मंज़िल ऊँचा है, जो 72 बारीक नक्काशीदार स्तंभों पर टिका है। इसका 43 मीटर ऊँचा शिखर द्वारका नगर के आकाश पर छाया रहता है और अरब सागर से भी दिखाई देता है।
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में भगवान शिव की विशाल 25 मीटर ऊँची प्रतिमा है जो कई किलोमीटर दूर से दिखती है। द्वारकाधीश मंदिर की पत्थर नक्काशी से लेकर शांत गोमती घाट द्वारका और लहरों से घिरे भड़केश्वर महादेव तक, हर स्थल गुजरात में वैदिक सभ्यता की भव्यता दर्शाता है।
स्थापत्य देखेंद्वारका नगर, गुजरात की खुरदरी अरब सागर तटरेखा के साथ बसे दिव्य मंदिरों और आध्यात्मिक स्थलचिह्नों को जानें, जहाँ प्रकृति की शक्ति भगवान कृष्ण और भगवान शिव की शाश्वत कृपा से मिलती है।
द्वारकाधीश मंदिर, नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, बेट द्वारका और द्वारका नगर के सभी पावन स्थलों की सार्थक तीर्थयात्रा के लिए आवश्यक जानकारी, द्वारकाधीश मंदिर के समय और स्थानीय मार्गदर्शन के साथ अपनी द्वारका गुजरात की दिव्य यात्रा की तैयारी करें।
द्वारकाधीश मंदिर खुलने का समय: प्रातः 6:30 से दोपहर 1:00 और सांध्य 5:00 से रात 9:30, सभी दिन। जगत मंदिर में प्रतिदिन पाँच आरतियाँ होती हैं। द्वारका, गुजरात के सर्वाधिक शुभ दर्शन के लिए सुबह 6:30 की मंगला आरती हेतु जल्दी पहुँचें।
अपनी द्वारका यात्रा तय करें: द्वारकाधीश मंदिर → गोमती घाट संध्या आरती → नागेश्वर ज्योतिर्लिंग (17 किमी) → ओखा से बेट द्वारका फ़ेरी → भड़केश्वर महादेव मंदिर → इस्कॉन मंदिर द्वारका गुजरात। पूरा 2 दिन का पावन परिपथ।
द्वारकाधीश मंदिर में पारम्परिक भारतीय पहनावा आवश्यक है। पुरुषों को धोती पहननी होती है। मुख्य गर्भगृह के भीतर फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है। मोबाइल फोन बंद रखें। द्वारका नगर, गुजरात के सभी मंदिर परिसरों में प्रवेश से पहले जूते-चप्पल उतार दें।
द्वारका, गुजरात जाने का सर्वोत्तम समय अक्टूबर से मार्च है, जब मौसम ठंडा और सुखद रहता है। जन्माष्टमी (अगस्त से सितंबर) द्वारकाधीश मंदिर का सबसे शुभ त्योहार है, जिसमें लाखों भक्त आते हैं। अप्रैल से जून से बचें जब द्वारका नगर का तापमान 40°C से ऊपर चला जाता है।
द्वारका नगर, गुजरात के द्वारकाधीश मंदिर, नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, बेट द्वारका, इस्कॉन मंदिर द्वारका और गोमती घाट जाने से पहले जो कुछ जानना ज़रूरी है, सब यहाँ।
द्वारकाधीश मंदिर खुलने का समय है प्रातः: सुबह 6:00 से दोपहर 1:00 और सांध्य: शाम 5:00 से रात 9:00, सप्ताह के सातों दिन। सुबह 6:00 बजे की मंगला आरती जगत मंदिर, द्वारका गुजरात का सर्वाधिक शुभ दर्शन है।
बेट द्वारका मंदिर खुला रहता है लगभग प्रातः: सुबह 6:00 से दोपहर 12:30 और सांध्य: दोपहर 2:30 से रात 8:00, मौसम के अनुसार। ओखा जेटी से फ़ेरी दिन भर चलती है। ओखा से बेट द्वारका की नाव यात्रा में लगभग 20 मिनट लगते हैं।
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थित है द्वारका नगर से 17 किमी दूर गुजरात में द्वारका-ओखा राजमार्ग पर। द्वारका से ऑटो-रिक्शा, टैक्सी या लोकल बस से पहुँचें। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर खुला रहता है सुबह 5:00 से रात 9:00 प्रतिदिन।
द्वारकाधीश मंदिर खुला रहता है सभी भक्तों के लिए निःशुल्क। कोई प्रवेश शुल्क नहीं। इस्कॉन मंदिर द्वारका और भड़केश्वर महादेव मंदिर के दर्शन भी निःशुल्क हैं। ओखा से बेट द्वारका की फ़ेरी का मामूली किराया लगता है।
निकटतम हवाई अड्डा: जामनगर एयरपोर्ट (145 किमी) या राजकोट एयरपोर्ट (215 किमी)। निकटतम रेलवे स्टेशन: द्वारका रेलवे स्टेशन राजकोट-ओखा रेल लाइन पर, सीधे द्वारका नगर में। नियमित ट्रेनें द्वारका को अहमदाबाद, मुंबई और दिल्ली से जोड़ती हैं।
गोमती घाट द्वारका पर संध्या आरती होती है सूर्यास्त पर, लगभग शाम 6:30 से 7:30 (समय मौसम के अनुसार बदलता है)। द्वारका नगर, गुजरात के इस सांध्य अनुष्ठान में भक्त गोमती नदी में दीये प्रवाहित करते हैं।
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