गोमती घाट द्वारका — गोमती नदी और अरब सागर का पवित्र संगम

जहाँ पवित्र गोमती नदी अरब सागर से मिलती है — 56 पवित्र कुंड, भव्य संध्या आरती और अविस्मरणीय सूर्यास्त।

संध्या आरती सूर्यास्त 56 पवित्र कुंड द्वारकाधीश से पैदल निःशुल्क
संध्या आरती सूर्यास्त के समय
पवित्र कुंड 56 कुंड
द्वारकाधीश से दूरी पैदल दूरी
प्रवेश निःशुल्क
स्नान पुण्यदायी
निकट सुदामा सेतु

गोमती घाट — पवित्र नदी और सागर का मिलन

गोमती घाट द्वारका के सबसे पवित्र और सुंदर स्थलों में से एक है। यह वह स्थान है जहाँ पवित्र गोमती नदी अरब सागर में मिलती है। हिंदू धर्म में नदी और सागर के इस संगम को अत्यंत पवित्र माना जाता है।

गोमती नदी को हिंदू पुराणों में अत्यंत पवित्र नदी बताया गया है। मान्यता है कि गोमती नदी भगवान विष्णु के चरणकमल से उत्पन्न हुई है। द्वारका में जहाँ यह नदी अरब सागर से मिलती है, उस स्थान को "गोमती संगम" कहते हैं और यहाँ स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

गोमती घाट पर स्थित 56 पवित्र कुंड (जलाशय) इस स्थान को और भी विशेष बनाते हैं। इन कुंडों में स्नान करने की परंपरा सदियों पुरानी है। प्रत्येक कुंड का अपना नाम और धार्मिक महत्व है।

संध्या आरती — एक अविस्मरणीय अनुभव

गोमती घाट पर होने वाली संध्या आरती द्वारका की सबसे मनोरम घटनाओं में से एक है। जब सूरज अरब सागर में डूबता है, तो घाट पर पुजारी दीपों की थाली लेकर नदी की आरती करते हैं। शंख, घड़ियाल और मंत्रोच्चार के साथ यह आरती एक अद्भुत आध्यात्मिक माहौल बनाती है।

आयोजन समय विशेष जानकारी
प्रातः स्नान सुबह 5:00 – 7:00 सूर्योदय से पहले स्नान सर्वोत्तम
घाट खुलता है सुबह 5:00 बजे प्रातःकालीन दर्शन
प्रातः आरती सुबह 6:30 बजे मंगला आरती के साथ
संध्या आरती सूर्यास्त के समय मौसम अनुसार 6:00–7:00 बजे
दीपदान संध्या आरती के बाद नदी में दीप छोड़ना

सुझाव: संध्या आरती के लिए कम से कम 30 मिनट पहले पहुंचें। आरती के समय बहुत भीड़ होती है। दीपदान के लिए दीप घाट पर ही उपलब्ध हैं।

56 पवित्र कुंड — गोमती घाट की विरासत

गोमती घाट पर 56 पवित्र कुंड (जलाशय या स्नानकुंड) हैं जो हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन कुंडों का निर्माण अलग-अलग युगों में विभिन्न राजाओं और संतों द्वारा करवाया गया था।

प्रत्येक कुंड का नाम किसी देवी-देवता, ऋषि या पौराणिक घटना के नाम पर रखा गया है। इन कुंडों में स्नान करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। तीर्थयात्री यहाँ अपने पूर्वजों का तर्पण और पिंडदान भी करते हैं।

56 पवित्र कुंड
2 नदियों का संगम
2500+ वर्ष पुरानी परंपरा
1 अनूठा संगम — नदी और सागर

गोमती घाट पर क्या करें

01

पवित्र स्नान

गोमती नदी में स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। सुबह सूर्योदय से पहले स्नान करना सर्वोत्तम है। मान्यता है कि इससे पाप धुल जाते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

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दीपदान

संध्या आरती के बाद गोमती नदी में मिट्टी के दीप छोड़ने की परंपरा है। यह दृश्य अत्यंत मनोरम होता है जब सैकड़ों दीप नदी में तैरते हैं।

03

तर्पण और पिंडदान

तीर्थयात्री यहाँ अपने पितरों (पूर्वजों) का तर्पण और पिंडदान करते हैं। इस स्थान पर पितृ-कर्म करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

04

संध्या आरती दर्शन

सूर्यास्त के समय गोमती घाट पर होने वाली संध्या आरती में सम्मिलित होना एक अलौकिक अनुभव है। घाट पर बैठकर आरती देखते समय मन को गहरी शांति मिलती है।

05

सूर्यास्त देखें

गोमती घाट से अरब सागर में सूर्यास्त का दृश्य अत्यंत मनोरम है। सोने जैसे रंग में रंगा आकाश और उसमें डूबता सूरज — यह दृश्य जीवन भर याद रहता है।

सर्वश्रेष्ठ समय और सुझाव

कब जाएं

  • सुबह: 5:00-7:00 बजे (स्नान)
  • शाम: सूर्यास्त से 1 घंटे पहले
  • शाम की आरती: 6:00-7:00 बजे
  • मानसून में घाट पर सावधानी

क्या लाएं

  • स्नान के लिए कपड़े
  • दीपदान के लिए दीप
  • पूजा सामग्री
  • तर्पण के लिए तिल-जल

कैसे पहुंचें

  • द्वारकाधीश मंदिर से पैदल
  • सुदामा सेतु के पास
  • ऑटो-रिक्शा उपलब्ध
  • द्वारका शहर के केंद्र में

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोमती घाट द्वारका में संध्या आरती कब होती है?
गोमती घाट पर संध्या आरती सूर्यास्त के समय होती है जो मौसम के अनुसार शाम 6:00 से 7:00 बजे के बीच होती है। सर्दियों में थोड़ी जल्दी और गर्मियों में थोड़ी देर से होती है।
गोमती घाट पर 56 कुंड क्या हैं?
गोमती घाट पर 56 पवित्र कुंड (जलाशय) हैं जिनका निर्माण विभिन्न राजाओं और संतों ने करवाया था। इन कुंडों में स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। प्रत्येक कुंड का नाम और धार्मिक महत्व अलग है।
गोमती घाट कहाँ है?
गोमती घाट द्वारकाधीश मंदिर के पास गोमती नदी के तट पर स्थित है। यह मंदिर से पैदल दूरी पर है — लगभग 5-10 मिनट की पैदल दूरी। सुदामा सेतु भी यहीं पास में है।
गोमती घाट पर स्नान का महत्व क्या है?
हिंदू धर्म में गोमती घाट पर स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि गोमती नदी का जल पवित्र है और इसमें स्नान से सभी पाप नष्ट होते हैं।
क्या गोमती घाट पर जाना निःशुल्क है?
हाँ, गोमती घाट पर जाना और स्नान करना पूर्णतः निःशुल्क है। संध्या आरती देखने के लिए भी कोई शुल्क नहीं है।

द्वारका में और भी देखें

द्वारकाधीश मंदिर

गोमती घाट से पैदल दूरी पर भगवान कृष्ण का चार धाम मंदिर। 8 दैनिक आरतियां और अलौकिक दर्शन।

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भड़केश्वर महादेव

अरब सागर में ज्वारीय चट्टान पर शिव मंदिर। संध्या आरती से पहले भड़केश्वर दर्शन करें।

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सुदामा सेतु पुल

गोमती घाट के पास गोमती नदी पर सस्पेंशन ब्रिज। सूर्यास्त से पहले पुल पार करें और आरती के लिए घाट पर उतरें।

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मंदिर समय 2026

संध्या आरती का समय मौसम के अनुसार बदलता है। सभी मंदिर और घाट आरती समय एक जगह देखें।

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