द्वारकाधीश मंदिर द्वारका गुजरात — जगत मंदिर का संपूर्ण गाइड

भगवान कृष्ण का शाश्वत धाम — द्वारका का पवित्र जगत मंदिर, 2500 वर्षों से अधिक समय से खड़ा एक चार धाम तीर्थ।

चार धाम निःशुल्क प्रवेश प्रतिदिन खुला 2500+ वर्ष पुराना
दर्शन समय सुबह 6:30 – रात 9:30
प्रवेश शुल्क निःशुल्क
निर्माण काल 2500+ वर्ष पूर्व
शिखर ऊंचाई 43 मीटर (141 फीट)
स्तंभ 72 पत्थर के स्तंभ
मुख्य देवता भगवान द्वारकाधीश (कृष्ण)

जगत मंदिर — भगवान कृष्ण का पवित्र धाम

द्वारकाधीश मंदिर, जिसे जगत मंदिर भी कहा जाता है, भारत के चार धाम तीर्थों में से एक है। यह पवित्र मंदिर गुजरात के द्वारका नगर में गोमती नदी के तट पर स्थित है। यहाँ भगवान श्रीकृष्ण को द्वारकाधीश अर्थात् द्वारका के राजा के रूप में पूजा जाता है।

हिंदू धर्म में द्वारका को सात पुरियों में से एक माना गया है — काशी, मथुरा, अयोध्या, हरिद्वार, कांचीपुरम, उज्जैन और द्वारका। प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु यहाँ भगवान कृष्ण के दर्शन करने आते हैं। मंदिर का वातावरण भक्ति और आस्था से ओत-प्रोत है।

द्वारकाधीश मंदिर की सबसे अनूठी विशेषता यह है कि यहाँ पाँच मंजिलों वाला भव्य शिखर है जिसकी ऊंचाई लगभग 43 मीटर (141 फीट) है। इस शिखर पर एक विशाल ध्वज फहराता है जो 84 फीट (25.6 मीटर) लंबा है। इस ध्वज को दिन में पाँच बार बदला जाता है।

द्वारकाधीश मंदिर का इतिहास

पुराणों के अनुसार, द्वारका नगरी का निर्माण स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने करवाया था। मथुरा छोड़ने के बाद भगवान कृष्ण ने अरब सागर के तट पर इस नगरी की स्थापना की थी। मान्यता है कि भगवान कृष्ण के पौत्र वज्रनाभ ने मूल मंदिर का निर्माण करवाया था।

ऐतिहासिक दृष्टि से, मंदिर को कई बार आक्रमणकारियों द्वारा नष्ट किया गया और बार-बार पुनर्निर्मित किया गया। 9वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने द्वारका की यात्रा की और इसे अपने चार मठों में से एक — शारदा मठ — की स्थापना के लिए चुना। वर्तमान मंदिर मुख्यतः 16वीं शताब्दी का है जिसमें चालुक्य शैली की वास्तुकला स्पष्ट झलकती है।

1958 में पुरातत्व सर्वेक्षण ने द्वारका तट के नीचे समुद्र में एक प्राचीन नगरी के अवशेष खोजे। यह खोज भगवान कृष्ण की ऐतिहासिक द्वारका नगरी के अस्तित्व का प्रमाण मानी जाती है। इस प्राचीन शहर के अवशेष आज भी जलमग्न हैं।

2500+ वर्ष का इतिहास
5 मंजिलें (मंडप)
72 पत्थर के स्तंभ
4 प्रवेश द्वार

मंदिर की वास्तुकला

द्वारकाधीश मंदिर चालुक्य शैली की वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। पाँच मंजिलों में बना यह मंदिर 72 पत्थर के स्तंभों पर टिका हुआ है। प्रत्येक स्तंभ पर बारीक नक्काशी है जो कारीगरों की अद्वितीय कुशलता का प्रमाण है।

मंदिर में दो मुख्य प्रवेश द्वार हैं — उत्तर द्वार (मोक्ष द्वार) और दक्षिण द्वार (स्वर्ग द्वार)। श्रद्धालु परंपरागत रूप से स्वर्ग द्वार से प्रवेश करते हैं और मोक्ष द्वार से बाहर निकलते हैं।

मंदिर के शिखर पर 84 फीट लंबा ध्वज (झंडा) फहराता है जिस पर सूर्य और चंद्रमा के चिह्न अंकित हैं। यह ध्वज द्वारका के चारों ओर से दिखाई देता है। इस ध्वज को दिन में 5 बार — प्रातःकाल, मध्याह्न, अपराह्न, सायंकाल और रात्रि में — बदला जाता है।

मंदिर की विशेष विशेषताएं

  • शिखर ऊंचाई43 मीटर (141 फीट)
  • ध्वज की लंबाई84 फीट (25.6 मीटर)
  • स्तंभ72 पत्थर के स्तंभ
  • मंजिलें5 मंजिलें
  • वास्तुशैलीचालुक्य (सोलंकी) शैली
  • निर्माण सामग्रीचूना पत्थर

दर्शन और आरती समय

दर्शन / आरती समय विशेष जानकारी
मंदिर खुलना सुबह 6:30 बजे मंगला आरती के साथ
मंगला आरती सुबह 6:30 बजे प्रातःकालीन प्रथम आरती
श्रृंगार आरती सुबह 7:00 बजे देवता का श्रृंगार दर्शन
ग्वाल आरती सुबह 7:30 बजे बालकृष्ण स्वरूप आरती
राजभोग आरती दोपहर 12:00 बजे मध्याह्न भोग आरती
दर्शन बंद दोपहर 1:00 बजे विश्राम काल
दर्शन पुनः खुलना शाम 5:00 बजे सायंकालीन दर्शन प्रारंभ
उत्थापन आरती शाम 5:00 बजे विश्राम से जागरण आरती
संध्या आरती शाम 7:00 बजे मुख्य सायंकालीन आरती
शयन आरती रात 9:00 बजे रात्रि शयन आरती
मंदिर बंद रात 9:30 बजे रात्रि विश्राम

विशेष नोट: त्योहारों और विशेष अवसरों पर दर्शन का समय परिवर्तित हो सकता है। जन्माष्टमी पर मंदिर रात भर खुला रहता है।

पोशाक नियम और मंदिर के आचार

द्वारकाधीश मंदिर एक अत्यंत पवित्र धार्मिक स्थल है। यहाँ सभी श्रद्धालुओं से शालीन और पवित्र वस्त्र पहनने की अपेक्षा की जाती है।

पुरुषों के लिए

  • धोती-कुर्ता अनुशंसित
  • पायजामा-कुर्ता स्वीकार्य
  • साफ और शालीन वस्त्र
  • जींस, शॉर्ट्स वर्जित
  • बिना आस्तीन की शर्ट वर्जित

महिलाओं के लिए

  • साड़ी या सलवार-सूट उत्तम
  • दुपट्टा अवश्य लें
  • पारंपरिक वस्त्र अनुशंसित
  • जींस, स्कर्ट वर्जित
  • पारदर्शी वस्त्र वर्जित

सामान्य नियम

  • मोबाइल फोन और कैमरे बाहर
  • चमड़े की वस्तुएं वर्जित
  • जूते-चप्पल बाहर उतारें
  • मंदिर परिसर में शांति बनाएं
  • प्रसाद केवल निर्धारित स्थान से

द्वारका कैसे पहुंचें

वायुमार्ग

निकटतम हवाई अड्डे:

  • जामनगर हवाई अड्डा — 137 किमी
  • पोरबंदर हवाई अड्डा — 110 किमी
  • अहमदाबाद हवाई अड्डा — 450 किमी

हवाई अड्डे से टैक्सी या बस द्वारा द्वारका पहुंचें।

रेलमार्ग

द्वारका रेलवे स्टेशन मंदिर से मात्र 1 किमी दूर है। प्रमुख रेलगाड़ियाँ:

  • अहमदाबाद से द्वारका एक्सप्रेस
  • मुंबई से सौराष्ट्र एक्सप्रेस
  • दिल्ली से हमसफर एक्सप्रेस (वाया राजकोट)

सड़क मार्ग

गुजरात के प्रमुख शहरों से दूरी:

  • अहमदाबाद — 450 किमी (NH 947)
  • राजकोट — 215 किमी
  • जामनगर — 137 किमी
  • पोरबंदर — 100 किमी

गुजरात SRTC बसें और प्राइवेट बसें उपलब्ध हैं।

प्रमुख त्योहार और उत्सव

द्वारकाधीश मंदिर में वर्ष भर अनेक महत्वपूर्ण त्योहार और उत्सव मनाए जाते हैं। इन अवसरों पर मंदिर और पूरी द्वारका नगरी अद्भुत आस्था और उत्साह से भर जाती है।

01

जन्माष्टमी

भगवान कृष्ण के जन्मदिन पर द्वारका में भव्य उत्सव मनाया जाता है। यह द्वारका का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है। लाखों श्रद्धालु इस अवसर पर यहाँ आते हैं और रात भर कीर्तन-भजन होते हैं।

02

होली (द्वारका की होली)

द्वारका में होली विशेष रूप से धूमधाम से मनाई जाती है। मंदिर में रंग-गुलाल के साथ भजन-कीर्तन होते हैं। यह पर्व पाँच दिनों तक चलता है।

03

देवोत्थान एकादशी

भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागने के उपलक्ष्य में यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन मंदिर में विशेष पूजा-आरती होती है और रात को दीपोत्सव होता है।

04

दीपावली

दीपावली पर द्वारकाधीश मंदिर दीपों से सजाया जाता है। पूरा मंदिर परिसर जगमगाता है और विशेष आतिशबाजी भी होती है।

05

शरद पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा की रात भगवान कृष्ण की रासलीला का स्मरण करते हुए विशेष कार्यक्रम आयोजित होते हैं। चाँदनी रात में मंदिर का दृश्य अत्यंत मनोरम होता है।

द्वारकाधीश के पास अन्य पवित्र स्थल

गोमती घाट

द्वारकाधीश मंदिर के पास गोमती नदी का पवित्र घाट। यहाँ की संध्या आरती अत्यंत दर्शनीय है।

पैदल दूरी

सुदामा सेतु

गोमती नदी पर बना झूलता पुल जहाँ से मंदिर और नदी के अद्भुत दृश्य दिखते हैं।

300 मीटर

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग

12 ज्योतिर्लिंगों में से एक, द्वारका से ओखा मार्ग पर स्थित।

17 किमी

बेट द्वारका

वह पवित्र द्वीप जहाँ भगवान कृष्ण का मूल निवास स्थान माना जाता है।

30 किमी

भड़केश्वर महादेव

अरब सागर में स्थित अनूठा शिव मंदिर, भाटे के समय पैदल पहुंचा जा सकता है।

2 किमी

इस्कॉन मंदिर

हरे कृष्ण संप्रदाय का सुंदर मंदिर जहाँ प्रतिदिन भव्य भजन-कीर्तन होता है।

1 किमी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

द्वारकाधीश मंदिर के दर्शन का समय क्या है?
द्वारकाधीश मंदिर प्रतिदिन सुबह 6:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक और शाम 5:00 बजे से रात 9:30 बजे तक खुला रहता है। विशेष त्योहारों पर समय परिवर्तित हो सकता है।
क्या द्वारकाधीश मंदिर में प्रवेश निःशुल्क है?
हाँ, द्वारकाधीश मंदिर में प्रवेश पूर्णतः निःशुल्क है। किसी भी प्रकार का कोई टिकट नहीं लगता। हालांकि विशेष दर्शन और पूजा के लिए शुल्क हो सकता है।
द्वारकाधीश मंदिर में पोशाक नियम क्या हैं?
मंदिर में प्रवेश के लिए शालीन वस्त्र आवश्यक हैं। पुरुष धोती-कुर्ता या पायजामा-कुर्ता पहनें। महिलाएं साड़ी, सलवार-सूट या दुपट्टा पहनें। जींस, टी-शर्ट, शॉर्ट्स वर्जित हैं। चमड़े की वस्तुएं लेकर अंदर न जाएं।
द्वारका कैसे पहुंचें?
द्वारका रेलगाड़ी, बस और सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है। निकटतम हवाई अड्डा जामनगर (137 किमी) और पोरबंदर (110 किमी) है। द्वारका रेलवे स्टेशन मंदिर से 1 किमी दूर है। अहमदाबाद से लगभग 450 किमी और राजकोट से 215 किमी की दूरी है।
द्वारकाधीश मंदिर में सबसे महत्वपूर्ण आरती कौन सी है?
मंगला आरती (सुबह 6:30 बजे) और संध्या आरती (शाम 7:00 बजे) सबसे महत्वपूर्ण हैं। जन्माष्टमी पर रात की आरती का विशेष महत्व है। संध्या आरती के दौरान मंदिर का वातावरण अत्यंत भक्तिमय होता है।
द्वारकाधीश मंदिर का निर्माण किसने करवाया?
मान्यता है कि मूल मंदिर का निर्माण भगवान कृष्ण के पौत्र वज्रनाभ ने करवाया था। वर्तमान मंदिर का निर्माण 16वीं शताब्दी में हुआ। मंदिर को कई बार पुनर्निर्मित किया गया है।

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