नागेश्वर ज्योतिर्लिंग द्वारका — भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक

द्वारका सर्किट का पहला ज्योतिर्लिंग — द्वारका से 17 किमी दूर ओखा राजमार्ग पर, गुजरात।

ज्योतिर्लिंग द्वारका से 17 किमी सुबह 5 बजे – रात 9 बजे निःशुल्क
दर्शन समय सुबह 5:00 – रात 9:00
द्वारका से दूरी 17 किमी
ज्योतिर्लिंग क्रमांक 12वाँ (अंतिम)
शिव प्रतिमा 25 मीटर (82 फीट)
मार्ग ओखा राजमार्ग
प्रवेश निःशुल्क

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग — भगवान शिव का पवित्र धाम

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह तीर्थस्थल गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में द्वारका से लगभग 17 किलोमीटर दूर ओखा-द्वारका राजमार्ग पर स्थित है। शिव पुराण में इस ज्योतिर्लिंग का उल्लेख "दारुकावने नागेशं" के रूप में मिलता है।

नागेश्वर का अर्थ है — नागों के ईश्वर, अर्थात् भगवान शिव। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने यहाँ "दारुका" नामक वन में प्रकट होकर अपने भक्तों की रक्षा की थी। इसीलिए इस स्थान को नागेश्वर या दारुकावन ज्योतिर्लिंग भी कहते हैं।

द्वारका की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करना अनिवार्य माना जाता है। यह द्वारका-बेट द्वारका-नागेश्वर के तीर्थ सर्किट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग

शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव ने पृथ्वी पर 12 स्थानों पर ज्योति के रूप में प्रकट होकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इन 12 स्थानों पर स्थापित लिंगों को ज्योतिर्लिंग कहा जाता है।

01

सोमनाथ

गुजरात, सौराष्ट्र में — प्रथम ज्योतिर्लिंग

02

मल्लिकार्जुन

आंध्र प्रदेश, श्रीशैलम में

03

महाकालेश्वर

मध्य प्रदेश, उज्जैन में

04

ओंकारेश्वर

मध्य प्रदेश, नर्मदा तट पर

05

केदारनाथ

उत्तराखंड, हिमालय में

06

भीमाशंकर

महाराष्ट्र, पुणे के पास

07

काशी विश्वनाथ

उत्तर प्रदेश, वाराणसी में

08

त्र्यंबकेश्वर

महाराष्ट्र, नासिक के पास

09

वैद्यनाथ

झारखंड, देवघर में

10

नागेश्वर

गुजरात, द्वारका के पास — यह स्थान

11

रामेश्वरम

तमिलनाडु, समुद्र तट पर

12

घृष्णेश्वर

महाराष्ट्र, औरंगाबाद के पास

25 मीटर विशाल शिव प्रतिमा और मंदिर परिसर

नागेश्वर मंदिर परिसर की सबसे आकर्षक विशेषता है — यहाँ स्थित भगवान शिव की विशाल 25 मीटर (82 फीट) ऊंची प्रतिमा। यह प्रतिमा दूर से ही दिखाई देती है और तीर्थयात्रियों को अपनी ओर आकर्षित करती है। भगवान शिव पद्मासन में विराजमान इस मूर्ति का दर्शन अत्यंत मनोरम है।

मंदिर परिसर में मुख्य गर्भगृह के अतिरिक्त कई अन्य मंदिर भी हैं। यहाँ माता पार्वती, भगवान गणेश और अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी हैं। परिसर अत्यंत स्वच्छ और सुव्यवस्थित है।

मंदिर परिसर की मुख्य विशेषताएं

  • शिव प्रतिमा ऊंचाई25 मीटर (82 फीट)
  • मुख्य लिंगनागेश्वर ज्योतिर्लिंग
  • देवीनागलाई माता (नागेश्वरी)
  • परिसर क्षेत्रविशाल आवास और पार्किंग सुविधा
  • पास का स्थानगोपी तालाब (12 किमी)

दर्शन और पूजा समय

पूजा / दर्शन समय विशेष जानकारी
मंदिर खुलना सुबह 5:00 बजे प्रातःकालीन दर्शन प्रारंभ
अभिषेक / रुद्राभिषेक सुबह 5:30 – 7:00 पंजीकरण आवश्यक, शुल्क देय
प्रातः आरती सुबह 6:00 बजे प्रातःकालीन मुख्य आरती
मध्याह्न आरती दोपहर 12:00 बजे मध्याह्न भोग आरती
दर्शन (अपराह्न) दोपहर 2:00 – 5:00 अपराह्न दर्शन
संध्या आरती शाम 6:00 बजे सायंकालीन आरती
रात्रि आरती रात 8:30 बजे रात्रि शयन आरती
मंदिर बंद रात 9:00 बजे रात्रि के लिए बंद

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे पहुंचें

द्वारका से

द्वारका शहर से नागेश्वर मंदिर तक:

  • दूरी: 17 किमी
  • समय: 20-30 मिनट
  • टैक्सी / ऑटो उपलब्ध
  • शेयर बस सेवा भी उपलब्ध

बेट द्वारका से

ओखा से नागेश्वर मंदिर:

  • ओखा से: 7 किमी
  • द्वारका-नागेश्वर-ओखा-बेट द्वारका सर्किट
  • एक दिन में सभी स्थल कवर कर सकते हैं

सुझाया गया मार्ग

तीर्थ सर्किट (एक दिन में):

  • सुबह: द्वारकाधीश मंदिर दर्शन
  • दोपहर: नागेश्वर ज्योतिर्लिंग
  • अपराह्न: ओखा — नौका
  • शाम: बेट द्वारका दर्शन

श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

01

सुबह जल्दी पहुंचें

रुद्राभिषेक और विशेष पूजा के लिए सुबह 5:30 बजे तक पहुंचना आवश्यक है। दोपहर में भीड़ अधिक होती है।

02

पारंपरिक वस्त्र पहनें

मंदिर में धोती-कुर्ता या सलवार-सूट पहनें। जींस और शॉर्ट्स से बचें।

03

पूजा सामग्री

बेलपत्र, धतूरा, भांग, दूध और जल लेकर आएं। ये वस्तुएं मंदिर के पास दुकानों पर भी उपलब्ध हैं।

04

द्वारका सर्किट में शामिल करें

नागेश्वर दर्शन को द्वारका-बेट द्वारका यात्रा के साथ जोड़ें। यह तीर्थ सर्किट एक दिन में पूरा हो जाता है।

05

महाशिवरात्रि पर विशेष आयोजन

महाशिवरात्रि पर नागेश्वर मंदिर में रात भर विशेष पूजा और जागरण होता है। इस अवसर पर लाखों भक्त आते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन का समय क्या है?
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर प्रतिदिन सुबह 5:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है। रुद्राभिषेक के लिए सुबह 5:30 से 7:00 बजे का समय निर्धारित है।
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग द्वारका से कितनी दूर है?
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग द्वारका शहर से लगभग 17 किलोमीटर दूर ओखा राजमार्ग पर स्थित है। टैक्सी से लगभग 20-30 मिनट का समय लगता है।
क्या नागेश्वर मंदिर में प्रवेश निःशुल्क है?
हाँ, सामान्य दर्शन बिल्कुल निःशुल्क है। रुद्राभिषेक, विशेष पूजा और अभिषेक के लिए अलग शुल्क देना होता है।
नागेश्वर मंदिर में 25 मीटर की प्रतिमा किसकी है?
मंदिर परिसर में भगवान शिव की 25 मीटर (82 फीट) ऊंची विशाल प्रतिमा है जो पद्मासन में विराजमान है। यह प्रतिमा दूर से ही दर्शनीय है और आध्यात्मिक प्रेरणा देती है।
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का पौराणिक महत्व क्या है?
शिव पुराण में बारह ज्योतिर्लिंगों की जो सूची है उसमें "दारुकावने नागेशं" के रूप में इस ज्योतिर्लिंग का उल्लेख है। मान्यता है कि यहाँ दर्शन करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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