इस्कॉन मंदिर द्वारका गुजरात — हरे कृष्ण मंदिर संपूर्ण गाइड

भगवान कृष्ण के पवित्र धाम द्वारका में इस्कॉन का भव्य मंदिर — जहाँ प्रतिदिन भजन-कीर्तन, आरती और महाप्रसाद से वातावरण भक्तिमय रहता है।

सभी के लिए खुला प्रतिदिन भजन-कीर्तन प्रसाद उपलब्ध निःशुल्क प्रवेश
मंगला आरती सुबह 4:30 बजे
मंदिर खुलने का समय सुबह 4:30 – रात 9:00
प्रवेश निःशुल्क, सभी के लिए
प्रसाद दोपहर और शाम उपलब्ध
द्वारकाधीश से दूरी लगभग 1 किमी
मुख्य देवता श्री कृष्ण-बलराम

इस्कॉन मंदिर द्वारका — परिचय

इस्कॉन (ISKCON) अर्थात् "इंटरनेशनल सोसायटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस" — जिसे हरे कृष्ण आंदोलन के नाम से भी जाना जाता है। इस संस्था की स्थापना 1966 में श्रील प्रभुपाद (अभयचरणारविंद भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद) ने न्यूयॉर्क में की थी।

द्वारका में इस्कॉन मंदिर भगवान कृष्ण के पवित्र धाम में एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र है। यह मंदिर सभी के लिए खुला है — किसी भी जाति, धर्म, वर्ण या राष्ट्रीयता के व्यक्ति यहाँ आ सकते हैं। इस्कॉन के मंदिरों में भगवद गीता के उपदेशों का प्रचार-प्रसार किया जाता है।

इस्कॉन मंदिर में प्रतिदिन कई आरतियाँ होती हैं, भजन-कीर्तन होता है और महाप्रसाद वितरित किया जाता है। यहाँ का वातावरण अत्यंत शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक है। विदेशी श्रद्धालु भी यहाँ बड़ी संख्या में आते हैं।

दैनिक कार्यक्रम और आरती समय

कार्यक्रम समय विवरण
मंगला आरती सुबह 4:30 बजे प्रातःकालीन प्रथम आरती
तुलसी पूजा सुबह 5:00 बजे तुलसी माता की परिक्रमा
श्रीमद भागवतम प्रवचन सुबह 7:00 बजे दैनिक शास्त्र प्रवचन
श्रृंगार दर्शन सुबह 7:15 बजे देवता का श्रृंगार दर्शन
राजभोग आरती दोपहर 12:30 बजे मध्याह्न भोग आरती
उत्थापन आरती शाम 4:30 बजे विश्राम के बाद आरती
संध्या आरती शाम 7:00 बजे भव्य संध्याकालीन आरती
शयन आरती रात 8:30 बजे अंतिम रात्रि आरती

प्रसाद और विशेष कार्यक्रम

महाप्रसाद

इस्कॉन मंदिर में भगवान कृष्ण को प्रतिदिन विभिन्न व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। इस महाप्रसाद को सभी भक्त ग्रहण कर सकते हैं। इस्कॉन का प्रसाद (भोग) शुद्ध शाकाहारी होता है।

भजन-कीर्तन

मंदिर में प्रतिदिन हरे कृष्ण महामंत्र का भव्य कीर्तन होता है। "हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे" — इस महामंत्र के जाप से मन को अपार शांति मिलती है।

भगवद गीता वर्ग

इस्कॉन मंदिर में नियमित रूप से भगवद गीता के अध्ययन वर्ग आयोजित होते हैं। श्रीमद भागवतम और अन्य वैष्णव ग्रंथों पर भी प्रवचन होते हैं।

इस्कॉन मंदिर में प्रमुख त्योहार

01

जन्माष्टमी

भगवान कृष्ण के जन्मदिन पर इस्कॉन मंदिर में भव्य उत्सव होता है। रात के 12 बजे अभिषेक होता है और उसके बाद महाभोग और महाप्रसाद वितरण होता है। यह इस्कॉन का सबसे बड़ा उत्सव है।

02

राधाष्टमी

राधा रानी के प्रकटोत्सव पर विशेष पूजा और आरती होती है। मंदिर को फूलों से सजाया जाता है और विशेष भोग लगाया जाता है।

03

रथयात्रा

इस्कॉन द्वारा रथयात्रा का भव्य आयोजन किया जाता है। भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा की प्रतिमाओं को सजे हुए रथ पर नगर में घुमाया जाता है।

04

गोवर्धन पूजा

दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा होती है। इस दिन इस्कॉन मंदिर में विशेष अन्नकूट महोत्सव होता है जिसमें 108 से अधिक व्यंजनों का भोग लगाया जाता है।

इस्कॉन मंदिर द्वारका कैसे पहुंचें

द्वारकाधीश मंदिर से

  • दूरी: लगभग 1 किमी
  • पैदल: 10-15 मिनट
  • ऑटो-रिक्शा: 5 मिनट

द्वारका रेलवे स्टेशन से

  • दूरी: 1-2 किमी
  • ऑटो-रिक्शा उपलब्ध
  • स्थानीय बसें भी चलती हैं

वेशभूषा और नियम

  • शालीन वस्त्र पहनें
  • जूते बाहर उतारें
  • मंदिर में शांति बनाएं
  • फोटोग्राफी की अनुमति पूछें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस्कॉन मंदिर द्वारका के दर्शन का समय क्या है?
इस्कॉन मंदिर में मंगला आरती सुबह 4:30 बजे होती है। मंदिर सुबह 4:30 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है। बीच में दोपहर को कुछ समय के लिए बंद होता है।
क्या इस्कॉन मंदिर में सभी के लिए प्रवेश है?
हाँ, इस्कॉन मंदिर सभी के लिए खुला है — किसी भी जाति, धर्म या राष्ट्रीयता के लोग आ सकते हैं। प्रवेश निःशुल्क है।
इस्कॉन मंदिर में प्रसाद कब मिलता है?
इस्कॉन मंदिर में राजभोग आरती (दोपहर 12:30) और संध्या आरती (शाम 7:00) के बाद महाप्रसाद वितरित किया जाता है।
इस्कॉन और द्वारकाधीश मंदिर में क्या अंतर है?
द्वारकाधीश मंदिर (जगत मंदिर) प्राचीन हिंदू मंदिर है और चार धाम तीर्थ का हिस्सा है। इस्कॉन मंदिर एक आधुनिक वैष्णव संस्था का मंदिर है जो भगवद गीता और भागवत के उपदेशों का प्रचार करती है। दोनों मंदिर एक-दूसरे के पूरक हैं।

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